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शिक्षक दिवस पर 1958 से चली आ रही परंपरा टूटी teachers-got-national-award-on-teacher-s-day


शिक्षक दिवस पर अब तक चली आ रही परंपरा से इतर इस बार राष्ट्रपति के बजाय उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने मंगलवार को शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए। इस दौरान नायडू ने शिक्षकों को बधाई देते हुए उन्हें ‘गुमनाम नायक’ बताया। हालांकि बाद में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी पुरस्कार पाए इन 219 शिक्षकों से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की।
राजधानी स्थित विज्ञान भवन में आयोजित पुरस्कार समारोह में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि शिक्षक भारत के भाग्य विधाता हैं जो अपनी ऊर्जा नए भारत के निर्माण के लिए विद्यार्थियों को गढ़ने में लगाते हैं।

शिक्षकों के पास अगले पांच वर्षों में देशों को 100 फीसदी साक्षर बनाने का लक्ष्य प्राप्त करने जैसी बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने आगे कहा कि भारत को कभी ‘विश्व गुरु’ के तौर पर जाना जाता था जहां नालंदा और तक्षशिला जैसे प्राचीन शिक्षण संस्थानों में दुनियाभर से लोग पढ़ने आते थे।

बता दें कि शिक्षकों के लिए वर्ष 1958 में शुरू किया गया राष्ट्रीय पुरस्कार उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को उनकी अनुकरणीय सेवा पर राष्ट्रपति द्वारा दिया जाता है।

इन पुरस्कारों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों का चयन किया जाता है। इस बार जिन शिक्षकों को सम्मानित किया गया उनके सीबीएसई से संबद्ध विद्यालय, आईसीएससीई, सैनिक स्कूल, केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, सीटीएसए और परमाणु ऊर्जा शिक्षा समिति द्वारा संचालित विद्यालय शामिल हैं।

दीक्षा पोर्टल की शुरुआत की
उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने इस मौके पर शिक्षकों के लिए ‘दीक्षा पोर्टल’ भी शुरू किया। सम्मान समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और नव नियुक्त मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह ने किया। जिन 219 शिक्षकों को सम्मानित किया गया उनमें 124 शिक्षक सूचना और संचार प्रोद्योगिकी (आईसीटी) के भी शामिल थे। 

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