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पहले घरेलू मिठाई की तरह बांटे जाते थे पद्म पुरस्कार, नरेंद्र मोदी ने इसे बदला : हुकुमदेव

पटना/मधुबनी : भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और पद्म पुरस्कार के लिए चयनित हुकुमदेव नारायण यादव ने शनिवार को कहा कि सरकार प्रतिभावान उपेक्षित, शोषित, गरीबों, दबे-कुचलों को भी सम्मानित कर रही है. उन्होंने इसे क्रांतिकारी परिवर्तन बताते हुए कहा कि पहले पद्म पुरस्कार घरेलू मिठाई की तरह बांटे जाते थे. उस समय न पात्र देखा जाता था, न कोई योग्यता, जिसको जैसी मर्जी, दे दिया जाता था.


मधुबनी लोकसभा क्षेत्र से सांसद हुकुमदेव नारायण यादव ने कहा, 'पहले पद्म पुरस्कार ऐसे व्यक्तियों को भी दिए जाते थे, जो टीवी पर कंपनियों के विज्ञापन कर सामान बेचते थे. अब कम से कम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक स्तर कायम किया है. आज ऐसे लोगों को चुना जा रहा है जो उपेक्षित थे, उपहासित थे, जिनकी ओर नजर नहीं जाती थी, लेकिन उसमें योग्यता, क्षमता, प्रतिभा थी. यह नए भारत का उदय हो रहा है.'
सांसद यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा, 'वे आज इन पुरस्कारों के लिए ना जाति देखते हैं ना ही क्षेत्र और ना ही धर्म. वे बस उस व्यक्ति की योग्यता, क्षमता देखते हैं. प्रधानमंत्री सुधार नहीं क्रांतिकारी परिवर्तन चाहते हैं.' ज्ञात हो कि हुकुमदेव नारायण यादव को पद्मभूषण सम्मान के लिए चयनित किया गया है.
अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जानेवाले भाजपा नेता ने इस पुरस्कार के लिए चयनित होने पर अपने अंदाज में कहा, 'यह भी पूछने की बात है? यह भी कोई प्रश्न है? मुझे ऐसा ही लग रहा है जैसे कोई उपेक्षित और उपहासित हो, कहीं उसको सम्मान न मिला हो और अचानक राष्ट्रीय सम्मान दिया जाए तो वह कितना आनंदित होगा, यह स्थिति आज है.'

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